• Sanjay Sinha

यही है हमारी किस्मत

यही है हमारी किस्मत ----------------- मेरे नाना नहीं चाहते थे कि मामा पुलिस की नौकरी में जाएं। पर किस्मत मामा को पुलिस की नौकरी में ही लेकर गई। मामा ने यूपीएससी की परीक्षा दी और आईपीएस अधिकारी बन गए। नियति भी कोई चीज़ होती है। मामा को मध्य प्रदेश कैडर मिला। इस तरह बिहार से उनका नाता छूट गया और मध्य प्रदेश चले आए। जब मेरी मां इस संसार से चली गई तो पिताजी को चिंता हुई कि उनका बेटा अब करेगा क्या? बिन मां के बेटे भला कहां कुछ कर पाते हैं, जो मैं कर पाता? पिताजी ने मुझे मामा के पास भेज दिया। जिनका चंद्रमा कमज़ोर होता है, उन्हें मां का सुख नहीं मिलता। पर मामा का मिल जाता है। मैं मां के पास कम रहा, मामा के पास अधिक रहा। मामा क्योंकि अपनी बहन से अथाह प्रेम करते थे, इसलिए बहन के बेटे पर भी उन्होंने अथाह प्रेम लुटाया। मेरी पढ़ाई भोपाल में मामा के साथ होने लगी। मामा पुलिस अधिकारी थे, पर पुलिस की नौकरी उन्हें पसंद नहीं थी। उन्होंने अपने तीनों बच्चों और एक भांजे को कभी नहीं उकसाया कि वो पुलिस की नौकरी में जाएं। पढ़ लिख कर मैं पत्रकार बन गया। कुछ वर्षों के लिए अमेरिका भी चला गया। जिन दिनों मैं अमेरिका में था, मैंने देखा था कि आम आदमी पुलिस को रहनुमा मानता है। घर में छोटा बच्चा भी ये जानता था कि 911 पर फोन करके पुलिस को कभी भी बुला सकते हैं। पुलिस मतलब दोस्त। बिल्ली पेड़ पर चढ़ गई और उतर नहीं रही तो पुलिस बुला लो। कमरा बंद हो गया नहीं खुल रहा तो पुलिस बुला लो। पुलिस मतलब भरोसा। किस पुलिस अधिकारी का पद क्या है, इससे किसी को कोई मतलब नहीं है। पुलिस मतलब पुलिस। आपने गाड़ी तेज़ चलाई पुलिस आपको रोक लेगी। अदब से बात करेगी। आप मान लेंगे कि आपने गाड़ी तेज़ चलाई तो आपको फाइन कर देंगे। नहीं मानेंगे तो मामला अदालत में चला जाएगा। पर पुलिस आपसे उलझेगी नहीं। आपको भी उससे नहीं उलझना है। पर भारत में? भारत में जिस पुलिस सिस्टम को अंग्रेजों ने बनाया था, उस सिस्टम की नींव में पुलिस को रक्षक नहीं भक्षक मानने का बीज पड़ा था। पुलिस वालों को लाल कलगी वाली टोपी, खाकी यूनिफॉर्म और हाथ में डंडा दिया गया था। उन्हें यही ट्रेनिंग मिली थी कि मारो, काटो, लूटो और खाओ। अंग्रेजों ने बहुत चालाकी से इस सिस्टम को जन्म दिया था। अंग्रेजों के मन में ये बात थी कि ऊंची पोस्ट पर तो वो खुद रहेंगे, पर छोटी पोस्ट पर भारतीय रहेंगे। उन्हें पावर दिया जाएगा, पर पैसा नहीं। ऐसे में वो लोगों पर जुल्म ढाएंगे, पैसे वसूलेंगे। किस पर जुल्म ढाएंगे? किससे पैसे वसूलेंगे? भारतीयों से। अंग्रेजों ने भारत में पुलिस व्यवस्था लागू करते हुए अति धूर्तता का परिचय दिया था। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की थी कि लोग पुलिस को देख कर भागने लगें। भारत में भारतीय से नफरत का बीजमंत्र था ये। यहां कभी पुलिस दोस्त बनी ही नहीं। पुलिस मतलब डर। नफरत। भारत अंग्रेजों से आजाद हुआ। पर अंग्रेजी सिस्टम से आजाद नहीं हुआ। यहां आज भी पुलिस के पास असीमित अधिकार हैं। वसूली उनकी पहली कमाई आज भी है। पुलिस को ये छूट अंग्रेजों ने दी थी कि लूटो और खाओ। वो जानते थे कि भारत की पुलिस अंग्रेजों को नहीं लूटेगी, अपनों को लूटेगी। गुलाम भारत की पुलिस और आजाद भारत की पुलिस में कोई अंतर नहीं रहा। इसीलिए आज आधी रात को कोई पुलिस वाला किसी को रोकने की कोशिश करता है तो आदमी भागता है। अंग्रेज पुलिस को असीमित अधिकार देकर गए हैं, इसलिए पुलिस वाले जब चाहें भागने वाले को माथे पर गोली मार सकते हैं। जैसे कोई बीमारी या सड़क हादसे में मर जाता है तो हम खुद को यही कह कर सांत्वना देते हैं कि ईश्वर ने इतनी ही उम्र बख्शी थी, उसी तरह यहां कोई पुलिस की लाठी, गोली से मर जाए तो मान लेना चाहिए कि ईश्वर ने इतनी ही ज़िंदगी बख्शी थी। इस देश में हम और आप पुलिस की लाठी या गोली से जितने दिन बचे हुए हुए हैं, वही है हमारी और आपकी किस्मत। #SanjaySinha #ssfbFamilyम

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