• Sanjay Sinha

वो घड़ी आ गई

Updated: Nov 24, 2018

वो घड़ी आ गई

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जिसका आपको था इंतज़ार, जिसके लिए दिल था बेकरार, वो घड़ी आ गई, आ गई, आ गई। जी हां, इंतज़ार की घड़ियां खत्म हुईं। #ssfbFamily मिलन समारोह की तारीख तय हो गई है। कायदे से मिलन समारोह नवंबर के महीने में होना चाहिए था, पर मध्य प्रदेश में चुनाव की तारीखों को देखते हुए नवंबर का महीना टालना पड़ा। बहुत उहापोह की स्थिति थी। हम कई-कई बैठकें कर चुके थे इस तारीख के लिए। कई लोग हमसे पूछ रहे थे कि संजय जी, मिलन समारोह कब है? कहां है? मैं तो पत्रकार हूं। मुझे तो पहले से पता होना चाहिए था कि साल 2018 में चुनाव होंगे। फिर मुझसे ये चूक कैसे हुई कि नवंबर के चुनाव को मैं ही चूक गया। चुनाव में आचार संहिता लग जाती है। तमाम तरह की पाबंदियां लग जाती हैं। लोगों की छुट्टियां रद्द हो जाती हैं, ऐसे में बहुत चाह कर भी भोपाल में मिलन समारोह में मुश्किल आ रही थी। हम सब लगातार बातें कर रहे थे कि कब किया जाए मिलन समारोह? दुनिया भर के अपने परिजन उहापोह की स्थिति में थे। खास कर अपने हरदोई के परिजन लगातार पूछ रहे थे कि कब मिलेंगे? Rakesh Pandey, Bharat Pandey Hardoi, मां Urmila Srivastava से मिलने तो मैं ही नहीं अपने सारे परिजन बेताब रहते हैं। इधर जबलपुर के परिजन भी जल्दी मचाए थे। अपने Kamal Grover भैया बार-बार कह रहे थे कि संजय, अगर भोपाल में मुश्किल है तो अपना जबलपुर जिंदाबाद। यहीं फिर कर लो मिलन समारोह। Pragya Mohilay भी बेताब हैं इस बार भोपाल के मिलन समारोह के लिए। पिछली बार वो पटना आई थीं। चुपचाप बैठी रहीं और जब मंच से उनका नाम अनाउंस हुआ कुछ बोलने आने के लिए तो पता चला कि जल्दी में निकल गई हैं। अपने राजीव चतुर्वेदी तो लगातार लगे ही थे कि अपन इस बार भी मिलन समारोह जबलपुर में करते हैं, मजा आ जाएगा। मेरा मन भी डांवाडोल होने लगा था। पर भोपाल के अपने परिजन संजय शर्मा डटे थे कि मिलन समारोह तो भोपाल में ही होगा। थोड़ी देर होगी, पर समारोह होगा भव्य, शानदार। उधर रुड़की में ममता सैनी और दिल्ली में Sunita Bindal बार-बार ज़ोर डाल रही थीं कि संजय सिन्हा जी भोपाल का प्रोग्राम जल्दी तय कीजिए, बाद में टिकट मिलने में बहुत मुश्किल होगी। वैसे भी फेसबुक परिजनों से मिलने को मन व्याकुल है। ये दोनों दो साल पहले जबलपुर आई थीं। पर पटना में दोनों गायब थीं। दोनों नहीं होने का मतलब समझते हैं आप? इंटेलिजेंस ब्यूरो के दो महत्वपूर्ण सदस्य गायब थे। दोनों मेरे शुभचिंतक। फेसबुक की हर गतिविधियों पर नज़र ऱखने वाले। ममता सैनी ने तो पिछले हफ्ते मुझसे चुपके से पूछ ही लिया कि संजय जी, आप मुझे जल्दी तारीख बताएं। मैंने उन्हें बताया कि 16 दिसंबर की तारीख तय हो रही है। वो रविवार का दिन होगा, राज्य में चुनाव पूरे हो चुके होंगे। Mamta Saini ने आव देखा न ताव। फटाफट टिकट कटा कर मेरे पास संदेश भेज भेज दीं। “देखिए हम कितने स्मार्ट हैं। आपने कहा, हमने टिकट ले लिया।” मैंने देखा टिकट नवंबर महीने का था। सारी दुनिया जानती है कि हड़बड़ी का काम गड़बड़ी का होता है। मैंने उन्हें उनसे कहा कि जल्दबाजी कभी नहीं करनी चाहिए। मैंने दिसंबर कहा, आपने नवंबर का टिकट ले लिया। उन्होंने कहा, “आएं! नवंबर का टिकट? हे राम जी। अब क्या होगा?” “होगा कुछ नहीं, टिकट वापस कीजिए और दिसंबर का लीजिए।” उन्होंने अपना सिर पीटते हुए फटाक से टिकट वापस किया और मुझसे कहा कि किसी को बताइएगा मत कि ममता ने हड़बड़ी में इतनी बड़ी गड़बडी की है। मैंने भी वादा किया कि किसी को नहीं बताऊंगा। तो आप कितना भी पूछें, मैं कुछ नहीं बताने वाला। दो दिन पहले मैं भोपाल आया। मेरे भोपाल पहुंचते ही जबलपुर से राजीव चतुर्वेदी भी भोपाल चले आए। कमल ग्रोवर भैया को भी आना था, पर ऐन वक्त पर वो भूल गए। खैर, जबलपुर से ही धीरज पटेरिया भोपाल पहुंच गए। कल अपने परिजन Sanjay Sharma और उनके दोस्तों से अपनी मुलाकात हुई। होटल मैरिएट, जहां मैं रुका हूं में लंबी बैठक चली। हम शहर के मेयर अालोक शर्मा से मिलने गए। आलोक संजय शर्मा के बड़े भाई हैं। बात से बात निकली। तारीख वहीं फाइनल हो गई कि 16 दिसंबर को भोपाल में संजय सिन्हा फेसबुक परिवार का मिलन समारोह होगा। उस दिन हम भोपाल में होंगे, आप भी भोपाल में होंगे। यहां बड़ा तालाब है, उसमें बोटिंग करेंगे। भोजपाल मंदिर देखेंगे। चिड़ियाघर भी देखेंगे। न्यू मार्केट में चाट खाएंगे। उससे पहले सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक हम मिलेंगे, गप करेंगे, साथ में खाना खाएंगे। भव्य इंतज़ाम रहेगा। Rajeev Chaturvedi जी की राय है कि हम इस बार एडवांस में रजिस्ट्रेशन कराएं, इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए। वो सब कैसे होगा, कौन करेगा, ये राजीव चतु्र्वेदी जी बताएंगे। हम तो इतना ही कहेंगे कि आप अभी से 16 दिसंबर को दुनिया के किसी कोने से भोपाल आने के लिए खुद को तैयार कर लीजिए। पटना के परिजन Mukesh Hissariya ने कल भी फोन किया कि बॉस तारीख फाइनल कीजिए, काम बताइए। लीजए, हो गई तारीख तय। बरेली में कई साल पहले गिरे एक झुमके को ढूंढ रहे अपने परिजन अशोक विष्णु शुक्ला ने वादा किया है कि झुमका मिले न मिले, भोपाल में रिश्तेदारों से मिलने ज़रूर आऊंगा। बनारस वाले डॉक्टर भैया वैसे तो हर बार ऐन वक्त पर टिकट कटाते हैं, पर इस बार बेताब हैं टिकट कटाने को। तो उनका फोन भी कई बार आ चुका है। सुनिए, आप शनिवार को एक दिन पहले भी आ सकते हैं। उस समय भोपाल का मौसम सुहाना रहेगा। एक तरह से ठंड का मौसम रहेगा, पर कड़कड़ाती ठंड नहीं रहेगी। जिसे यहां रहने के लिए किसी इंतज़ाम में मदद की ज़रूरत हो, एडवांस में संजय शर्मा जी से संपर्क करेंगे। ध्यान रहे, हड़बड़ी अच्छी बात नहीं होती। आराम से टिकट लीजिए। ऐसी ट्रेन में टिकट लीजिए जो सुबह-सुबह भोपाल पहुंच जाए। अभी समय है, टिकट आसानी से मिल जाएंगे। भोपाल मेरे कर्म का शहर है। मेरी यादों का शहर है। भोपाल हिंदुस्तान के खूबसूरत शहरों में से एक है। आप आएं, हमसे मिलें, खुद से मिलें। अभी तो ये मनुहार का पहला पत्र है। कई पत्र आपके पास आएंगे। ये एडवांस पत्र है, ताकि सनद रहे। आइए। एक नए संसार की सैर कीजिए। रिश्तों के संसार में समा जाइए। हम सब पलक पांवड़े बिछाए बैठे हैं। आज कहानी नहीं। आज कुछ भी नहीं। आज तो बस आप, आप, आप ही दिल में समाए हैं। आपका, संजय सिन्हा

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स्थान- भोपाल तारीख-16 दिसंबर #SanjaySinha #ssfbFamily

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